प्रवर्तन (Pravartan)
उत्पत्ति (व्युत्पत्ति) :— संस्कृत धातु 'वृ' (जिसका अर्थ है — घुमाना, चलाना, करना) जिसमें उपसर्ग ‘प्र’ जुड़ने से बना—प्र + वृ → प्रवर्तनम्। 'तन' प्रत्यय से 'वर्तन' और उसके आगे 'प्र' उपसर्ग।
अर्थ :—
- किसी कार्य को आरम्भ करना
- किसी नियम, योजना या नीति को लागू करना
- किसी विचार या प्रणाली का प्रचार-प्रसार
संदर्भ में प्रयोग :—
"नई शिक्षा नीति का प्रवर्तन आगामी वर्ष से किया जाएगा।"
"समाज में स्वच्छता का प्रवर्तन आवश्यक है।"
प्रभूत (Prabhūta)
उत्पत्ति :— संस्कृत धातु 'भू' (जिसका अर्थ है — होना, उत्पन्न होना) में जुड़ा है उपसर्ग 'प्र'। अर्थ हुआ—"बहुत अधिक उत्पन्न होने वाला।"
अर्थ :—
- बहुत अधिक, प्रचुर
- बड़े पैमाने पर, विपुल मात्रा में
संदर्भ में प्रयोग :—
"इस गाँव में गेहूँ का प्रभूत उत्पादन होता है।"
"उन्हें इस विषय का प्रभूत ज्ञान है।"
तत्सत (Tatsat)
उत्पत्ति :— संस्कृत के दो पदों से निर्मित—'तत्' (वह / परम) + 'सत्' (सत्य, शुभ, कल्याणकारी)। यह शब्द वेदों और भगवद्गीता में भी आया है।
अर्थ :—
- "यही सत्य है", "परम सत्यम्"
- शुभता, पवित्रता, सत्य का सूचक
- यज्ञ, दान आदि कर्मों को पवित्र बनाने वाला दैवी शब्द
धार्मिक/दार्शनिक संदर्भ :— भगवद्गीता 17.23 — "ॐ तत्सत्"। ब्रह्म का, सत्य का द्योतक।
संदर्भ में प्रयोग :—
"विद्वानों ने अपने भाषण का समापन 'ॐ तत्सत्' से किया।"
"तत्सत का अर्थ है—जो सत्य है वही सर्वोच्च है।"
कालजयी (KALJAYEE)
उत्पत्ति :— काल (समय) + जयी (जिसने जीत लिया, ‘जय’ धातु से)। अर्थात—जो समय को जीत ले, जिसे समय मिटा न सके।
अर्थ :—
- अमर, सदैव प्रासंगिक
- जो समय बीतने पर भी लोकप्रिय और प्रभावी रहे
- कालातीत
संदर्भ में प्रयोग :—
"तुलसीदास की ‘रामचरितमानस’ एक कालजयी कृति है।"
"सुभाष चंद्र बोस के विचार कालजयी हैं।"
सुष्ठु (Suṣṭhu)
उत्पत्ति: संस्कृत उपसर्ग 'सु' (अच्छा, श्रेष्ठ) + धातु-आधारित क्रियाविशेषण 'ष्ठु'। मिलकर अर्थ देते हैं—बहुत अच्छी तरह, 'भली प्रकार'।
अर्थ :—
- अत्यंत उत्तम रूप से, भलीभाँति
- बहुत अच्छे ढंग से, पूर्णतः
संदर्भ में प्रयोग :—
"उन्होंने अपना कर्तव्य सुष्ठु निभाया।"
"वह संस्कृत भाषा को सुष्ठु जानता है।"
समग्र निष्कर्ष
| शब्द | उत्पत्ति | मुख्य अर्थ |
|---|---|---|
| प्रवर्तन | प्र + वृ (धातु) | आरम्भ, लागू करना, प्रचार |
| प्रभूत | प्र + भू (धातु) | बहुत अधिक, विपुल |
| तत्सत | तत् + सत् | परम सत्य, पवित्रता का संकेत |
| कालजयी | काल + जयी | अमर, कालातीत |
| सुष्ठु | सु + ष्ठु | भली प्रकार, उत्तम रूप से। |
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